यात्रा बनी सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने गांव-गांव में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों का किया स्वागत-सम्मान-लगाया गले
इन्दौर। सामाजिक समरसता और एकता की अलख जगाने निकली स्नेह यात्रा का आज इंदौर में आठवा दिन था। यह यात्रा आज इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण पर थी। इस यात्रा में शामिल स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने गांव-गावं में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों का तिलक लगाकर और पुष्पहार पहनाकर स्वागत सम्मान किया। उन्होंने अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को गले लगाकर समरसता का संदेश दिया। यह यात्रा सामाजिक समरसता और एकता की अनूठी मिसाल बनी है।
यह यात्रा सबसे पहले आज इंदौर जिले के सांवेर विकासखण्ड के ग्राम गुरान पहुंची। यहां पर शोभायात्रा के साथ स्कूल भवन में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर श्री श्री विद्याधाम के आचार्य श्री आनन्द शुक्ला द्वारा मंगलाचरण कर किया गया। स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी अपने देश को समृद्ध देश बनाने हेतु सभी समान हो कर कंधे से कंधा मिलाकर काम करे। हमारा देश समृद्ध एवं उन्नत राष्ट्र बनें इसके लिये सबको एकजुट होकर विकास और प्रगति में सहभागी बनना होगा।
यह यात्रा ग्राम मालाखेड़ी पहुंची। स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि जो मनुष्य अपने लिए सोचता है, वह सामान्य मनुष्य है और जो परहित की लिये सोचे वह सभी संत समान है। स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने अनुसूचित जाति के पर्वत जी केरव और कमल केरव का तिलक लगाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया। इसी प्रकार ग्राम हतुनिया मे महामण्डलेश्वर दीदी दिव्य चेतना दीदी मां द्वारा एक भजन प्रस्तुत किया गया। स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने स्नेह यात्रा के उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि आप सभी भारत को विश्वगुरु बनाने हेतु एकजुट होकर कार्य करें। ग्राम बरलाई जागीर मे शोभायात्रा के साथ स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज को गांव के चौक तक लाया गया। यहां पर ग्रामीण महिलाओं ने गुरूदेव के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया। बाद में स्वामी श्री परमानंद गिरी जी महाराज ने उपस्थित सहभागियों को स्नेह यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि भारत के आत्मसम्मान को फिर से प्राप्त करने के लिए भेदभाव को मिटाना अनिवार्य है। सभी वर्गों के लोग एक दूसरे का सम्मान करें तभी यह संभव है। स्नेह यात्रा का सहभोज बरलाई जागीर में करवाया गया। यहां पर स्वामी जी द्वारा सभी लोगों के साथ सहभोज किया गया।


