Apr 17 2026 / 9:01 PM

लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, पक्ष में मात्र 298 वोट, विपक्ष में 230 वोट पड़े

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। दो दिन की चर्चा के बाद संशोधन विधेयक पर आज वोटिंग हुई जिसमें इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।

इस बिल को पास होने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी की जरूरत थी। यानी संख्या बल के आधार पर इसके पक्ष में कुल 352 वोट पड़ने चाहिए थे मगर 54 वोट कम रह गए और इस तरह से 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया।

बता दें कि संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए थे।

इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य सत्ता पक्ष के सांसदों के द्वारा इन विधेयको पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष से यह आह्वान किया था कि वो महिला आरक्षण विधेयक पर सत्ता पक्ष का साथ देते हुए उसके पक्ष में वोटिंग करे क्योंकि आधी आबादी को उसका अधिकार मिले यह जरूरी है। इसके अलावा मोदी ने कल लोकसभा में अपने संबोधन में विपक्ष को इस बात की गारंटी दी थी कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य, परिसीमन में किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।

लोकसभा में गुरुवार और शुक्रवार को पूरे दिन की चर्चा के बाद आज 131वां संविधान संशोधन विधेयक पर वोटिंग हुई मगर संख्या बल कम होने कारण महिला आरक्षण से संबंधित यह बिल निचले सदन से पारित नहीं हो सका। विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने परिसीमन समेत अन्य बिलों का विरोध जताया।

तीनों विधेयकों के बारे में जानिए

केंद्र सरकार जो 3 विधेयक लाई हैं, उसमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता खुलेगा। परिसीमन (संशोधन) विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन और नई जनगणना आधारित सीटों का बंटवारा करने का प्रावधान है। तीसरे विधेयक में केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रावधान है।

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