Sep 30 2026 / 6:34 PM

पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। दिवाली पर पटाखे पर रोक रहेगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो पटाखों को जलाने के मामले में संतुलित यानी बीच का रास्ता निकालेगा। कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी रोक लगा दी, तो कुछ लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि वो देशभर में पटाखों पर पूरी तरह बैन के पक्ष में नहीं। साथ ही बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों को होने वाली दिक्कत देखते हुए 24 घंटे पटाखे जलाने की मंजूरी भी नहीं दी जा सकती। अब 15 अक्टूबर को इस मामले में सुनवाई होगी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा समाधान निकाला जाएगा, ताकि पटाखे चलाने का समय तय हो और ये भी तय किया जाएगा कि किस तरह के पटाखे लोग जला सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और केंद्र सरकार से कहा कि वो पटाखों में इस्तेमाल किए जाने वाले बेरियम की जांच करे। साथ ही पटाखों से होने वाले आवाज के स्तर की भी जांच हो।

दिल्ली और आसपास दिवाली के मौके पर पटाखे जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ने की बात कही जाती है। ठंड के मौसम में दिल्ली और आसपास गंभीर प्रदूषण होता है। साल 2023 में दिल्ली और एनसीआर में ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री और उनको जलाने की मंजूरी सुप्रीम कोर्ट ने दी थी।

साल 2024 में जब पटाखे जलाने पर रोक लगाई गई थी, उस वक्त दिवाली पर लोगों ने इस आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए जमकर आतिशबाजी की थी। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि बैन के बाद भी पटाखे कैसे जलाए गए। पटाखों पर बैन के खिलाफ तमाम लोग आवाज उठाते रहे हैं।

इन लोगों का कहना है कि एक-दो दिन की आतिशबाजी से प्रदूषण नहीं फैलता। पटाखों पर बैन का विरोध करने वालों का कहना है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में वाहनों के धुएं और पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में पराली जलाने से ही प्रदूषण होता है।

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