Jul 25 2026 / 10:33 PM

सारनाथ बौद्ध स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

नई दिल्ली। यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में वाराणसी के सारनाथ बौद्ध स्थल को शामिल किया गया है। भगवान गौतम बुद्ध ने सारनाथ में ही अपना पहला उपदेश दिया था। उत्तर प्रदेश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।

दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज समिति के 48वें सत्र में यह ऐतिहासिक ऐलान किया गया। सारनाथ भारत का 45वां और यूपी का चौथा विश्व धरोहर स्थल है। इससे पहले यूपी के आगरा में स्थित ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की शाश्वत सभ्यतागत विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है। सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है और यह उत्तर प्रदेश की गौरवशाली आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का एक शानदार प्रतिबिंब है। योगी बोले, उत्तर प्रदेश इस शाश्वत विरासत का अनुभव करने के लिए दुनिया भर के लोगों के स्वागत के लिए तैयार है।

सारनाथ को जुलाई 1998 में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। अब लगभग 28 सालों के लंबे इंतजार के बाद इस ऐतिहासिक स्थल को विश्व धरोहर घोषित किया गया है। वैसे तो हर साल बहुत बड़ी संख्या में दुनिया भर से पर्यटक विशेषकर बौद्ध समुदाय के लोग सारनाथ आते हैं लेकिन अब जब यह स्थल वर्ल्ड हेरिटेज घोषित हो गया है तो इससे यहां पर पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को पंख लगेंगे।

सारनाथ में स्थित धम्मेक स्तूप बौद्ध धर्म का एक प्रमुख स्थल है। तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक के द्वारा इस स्तूप का निर्माण कार्य कराया गया था। इसके अलावा सारनाथ में चौखंडी स्तूप और सारनाथ संग्रहालय भी हैं जहां बौद्ध कला और संस्कृति का अद्भुत परिचय प्राप्त होता है।

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