Aug 04 2026 / 10:41 PM

जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ा संशोधन विधेयक राज्यसभा से पास

नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन राज्यसभा से आज जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पास हो गया है। इस विधेयक को जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में संशोधन के लिए सदन में लाया गया था। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल को राज्यसभा में पेश किया।

उन्होंने बताया कि इस संशोधन बिल को लाने का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन संबंधी व्यवस्था में बदलाव करना है ताकि प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जा सके। इससे पहले 31 जुलाई को लोकसभा में बिना चर्चा के इस विधेयक को पारित कर दिया गया था।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस कानून में इस संशोधन से जन्म और मृत्य का देरी से रजिस्ट्रेशन कराने के प्रावधानों को और सख्त किया जा सकेगा। एक साल तक की समयावधि के दौरान जन्म या मृत्यु पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। जैसे अभी तक जन्म या मृत्यु के 21 दिन के अंदर सूचना देने पर सामान्य रूप से रजिस्ट्रेशन होता है आगे भी वैसे ही होता रहेगा। लेकिन 21 दिन बाद और एक साल के अंदर रजिस्ट्रेशन कराने पर नियमानुसार तय विलंब शुल्क देय होगा।

वहीं अगर जन्म या मृत्यु की तारीख के एक साल के बाद और दो साल की समयावधि के अंदर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए डीएम, एसडीएम या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी की परमीशन जरूरी होगी।

ऐसे मामलों जिसमें जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो ऐसे मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण कराया जा सकेगा। सरकार के अनुसार, इस नए संशोधन प्रस्ताव से जन्म और मृत्यु संबंधी फर्जी रजिस्ट्रेशन पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

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