नई दिल्ली। भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (सीओए) के ताजा फैसले को खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि यह तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय “अवैध रूप से गठित” है और उसके सभी फैसले अमान्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, जैसे पहले दिए गए सभी फैसलों को खारिज किया गया था. भारत ने कभी भी इस अदालत के गठन को मान्यता नहीं दी।
भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के ताजा फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत ने साफ कहा है कि यह अदालत अवैध तरीके से गठित की गई है और इसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है। इसलिए इसके किसी भी फैसले, आदेश या कार्रवाई को भारत मान्यता नहीं देता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 15 मई 2026 को सिंधु जल संधि के तहत अधिकतम जल भंडारण क्षमता से जुड़े मामले में एक तथाकथित फैसला जारी किया है।
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अब भी लागू है। भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु नदी प्रणाली के जल उपयोग को लेकर यह संधि हुई थी।
भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।
भारत ने कहा कि कोई भी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन, खासकर ऐसा अवैध रूप से गठित निकाय, भारत के संप्रभु अधिकारों के तहत उठाए गए कदमों की वैधता पर सवाल नहीं उठा सकता।
भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस “फर्जी मध्यस्थता प्रक्रिया” का सहारा लेना उसकी लंबे समय से चली आ रही धोखाधड़ी और अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग की नीति का हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय ने पहले भी कहा था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दबाव बनाने और आतंकवाद के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए करता रहा है। पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित रखना भी शामिल था।


