बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के पूर्व सीएम और अब दिवंगत अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को राम अवतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा सुना दी। जुर्माना न अदा करने पर अमित जोगी को और छह महीने की कैद की सजा भुगतनी होगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने सीबीआई की अपील मंजूर कर सुनवाई की थी। जिसके बाद बीते दिनों बेंच ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।
राम अवतार जग्गी एनसीपी के ट्रेजरार थे। उनकी हत्या 2003 में हुई थी। इस मामले में अमित जोगी समेत 30 आरोपी थे। सीबीआई ने सभी पर आईपीसी की धारा 302 और साजिश रचने की धारा 120-बी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
ट्रायल कोर्ट ने 31 मई 2007 को जग्गी हत्याकांड में 28 लोगों को सजा सुनाई थी, लेकिन सबूत न होने की बात कहकर अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस पर सीबीआई ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने उस वक्त कहा था कि जांच एजेंसी ने वक्त बीतने के बाद अपील की है। इस वजह से इसे मान्य नहीं किया जा सकता। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने मामले को सुना। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए कहा कि एक ही गवाही पर कुछ लोगों को दोषी करार देना और साजिश रचने वाले को बरी करना कानूनी तौर पर गलत है।
हाईकोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद अमित जोगी ने वीडियो जारी कर कहा था कि उनको सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। इस मामले में अब अमित जोगी के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के आसार हैं। अगर वहां से राहत न मिली, तो अमित जोगी को अपनी बाकी जिंदगी जेल में ही काटनी पड़ेगी। राम अवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या की गई थी।


