Oct 20 2026 / 5:27 PM

आरएसएस के विजयादशमी उत्सव में बोले मोहन भागवत- रिजीम चेंज न हुआ, न आगे होगा

नागपुर। विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम संघ मुख्यालय नागपुर में आयोजित हुआ। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की है। इसके बाद स्मृति मंदिर में RSS संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित किया। मोहन भागवत ने अपने भाषण में रिजीम चेंज पर विपक्ष को नसीहत दी। वहीं हाल के सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर युवाओं और लोगों से कहा कि हम जब भी बंटे कमजोर हुए हैं। विदेशी ताकतें हमें अस्त-व्यस्त करने में लगी हुई है।

मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से आंधी चली है, जो हर तरह के संस्कृति से विरोध रखती है, उसे नष्ट करना चाहती है। फ्रांस में क्या हो रहा है, नेपाल में बांग्लादेश में क्या हुआ। वो कहते हैं कि रिजीम चेंज (सरकार बदलने) करने से हालात बदलेंगे, लेकिन न ऐसा पहले हुआ है, न आगे होगा। भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं, लेकिन पिछले सालों से जिस नीति से भारत चला, उसने पक्के नेतृत्व ने इसे चलाया। नई पीढ़ी के कारण भारत का जो पुरुषार्थ बना, आसुरी ताकत का खेल बंद हो गया, इसलिए भारत इनका लक्ष्य है।

मोहन भागवत ने कहा कि समस्या के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए। आंदोलन करने वाला कोई समूह हो, अखंड समाज में किसी प्रकार का विभाजन, द्वेष नहीं होना चाहिए। आंदोलन से समस्या का समाधान होगा, इसके उदाहरण बहुत कम हैं। समाज की सक्रियता से समाधान के कई उदाहरण है। समाज और देश को केवल नेता नहीं चला रहा, समाज देश को चलाता है।

आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य से चले तो राजनीति का साधन बन जाता है, विरोध भड़काने का काम करता है। समाज से काटकर एक अलग वर्ग बनाना और व्यवस्था के बारे में विरोध बनाना, कलह करना, पहले भी करते आए हैं और आज भी कर रहे हैं। विश्व में भारत को दबाने वाली शक्तियां मौजूद हैं। किसी तरह से उत्तेजित नहीं होना है। हमको सतत प्रयास करने पड़ेंगे।

कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की विविधता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत माता का सर्वोच्च स्थान है। देश में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं, लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। भागवत ने कहा कि देश पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी इसी एकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा।

संघ प्रमुख ने कहा कि संघर्ष के कारण मन में घाव पड़े हैं। गांठें भी पड़े हैं। ये गांठें सुलझ जाए, नई गांठें न पड़े, ऐसा हमारा व्यवहार होना चाहिए। छोटी छोटी बातों पर उकसाने वाले ताक लगाकर बैठे हैं। कई लोग झगड़ा लगाना चाहते हैं। संघ पर भी उछालते हैं। जिनका संघ से कोई लेना देना है, फिर भी संघ पर सवाल उठाते हैं। संघ सबसे प्रति प्रेम रखता है। संघ स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहता, न लोकप्रियता, न प्रतिष्ठा। समाज का जिससे भला हो, हम वो करते हैं।

इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम में बंगाल के राज नायारण बसु का जिक्र किया। उनके जन्म को 200 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा, समाज में स्वदेशी मेलों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करने के लिए राज नायारण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संत रविदास के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा, ‘जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों का सामना कर रहा था और लोगों पर अत्याचार हो रहे थे तब चारों ओर डर का माहौल था। ऐसे समय में संत रविदास ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया।

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