नई दिल्ली। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक वीडियो प्रसारित किए जाने को लेकर सरकार से माफी मांगी है। मार्क जुकरबर्ग ने इस तरह की गलतियों पर खेद जताते हुए इसमें सुधार की बात कही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ खास तरह के कंटेट को बूस्ट करने के लिए कंपनी को भुगतान किया गया था। जुकरबर्ग को भारत सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया कि वो मध्यस्थ की भूमिका के अंतर्गत नहीं आते हैं। उनको यह चुनना होगा कि किस प्रकार का कंटेट प्रसारित करना है और किस प्रकार के कंटेट को रोकना है।
कंपनी को यह भी स्पष्ट तौर पर बता दिया गया है कि इंटरमीडियरी की परिभाषा के तहत उसे कोई संरक्षण नहीं मिलेगा। साथ ही साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सेफ हार्बर का लाभ भी लागू नहीं होगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 जुलाई के वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई थी।
केंद्र सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को तलब किया था। आज मेटा के अधिकारियों के साथ सरकार की बैठक हुई इसमें कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी, प्रधानमंत्री की फेसबुक को हटाने संबंधी मामलों पर चर्चा की गई। साथ ही साथ मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी मांगने का सरकार की ओर से अल्टीमेटम दिया गया था।
इससे पहले भी मेटा की तरफ से मोदी का वीडियो हटाए जाने पर खेद जताया जा चुका है मगर सरकार मेटा के जवाब से संतुष्ट नहीं थी। दरअसल मेटा ने यह कहकर बात को निपटाने की कोशिश की थी कि मोदी का वीडियो गलती से हट गया था। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए मेटा के अधिकारियों को तलब कर लिया था।


