तेहरान। ईरान ने पश्चिम एशिया संघर्ष में मध्यस्थता की पाकिस्तान की कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। वहीं, ईरान ने अमेरिका की मांगों को अस्वीकार्य बताते हुए संकट के शीघ्र समाधान की संभावनाओं को भी पीछे धकेल दिया है।
ईरान ने पाकिस्तान द्वारा खुद को पश्चिम एशिया संघर्ष में मध्यस्थ के तौर पर पेश करने के प्रयासों को ठुकरा दिया है। सूत्रों के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया है। इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
पाकिस्तान ने यह दावा करते हुए अपनी कूटनीतिक क्षमता का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी कि वह ईरान और अमेरिका दोनों पक्षों से संवाद स्थापित करने में सक्षम है। हालांकि, ईरान और पाकिस्तान के बीच गहरे अविश्वास के चलते, ईरानी पक्ष किसी भी बातचीत में इस्लामाबाद को कोई भूमिका देने से हिचकिचा रहा है।
हालांकि, इस बीच कुछ उम्मीद की किरण जगी है, क्योंकि रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान इस क्षेत्र के एक अन्य महत्वपूर्ण खिलाड़ी कतर के जरिए मध्यस्थता के प्रयास पर विचार कर सकता है। इस बीच, क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
हालांकि पाकिस्तान ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से नकार दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की उसकी पहल शुरुआती दौर में ही अटक गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद और कल्पना मात्र करार देते हुए कहा कि किसी भी आधिकारिक सूत्र के हवाले से ऐसी बातें कहना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से इस तरह की कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि मौजूदा संवेदनशील हालात में कूटनीति के लिए जिम्मेदारी और सावधानी बेहद जरूरी है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे केवल आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें और किसी तरह की अटकलों से बचें।
ईरानी सेना का कहना है कि उन्होंने अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ अपने जवाबी अभियान की 93वीं लहर पूरी कर ली है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कब्जे वाले क्षेत्रों के अंदर गहरे इस्राइली सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। IRGC ने यह भी कहा कि पश्चिमी गैलिली, हाइफा, काफर कन्ना और क्रायोट में इज़राइलियों के एकत्रित होने और युद्ध समर्थन के केंद्रों को सटीकता से निशाना बनाया गया।


