Mar 11 2026 / 9:58 PM

पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु को मंजूरी, माता-पिता ने लगाई थी बेटे के लिए गुहार

नई दिल्ली। देश में पहली बार इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच ने बुधवार को 2018 के कॉमन कॉज फैसले के आधार पर हरीश राणा नाम के युवक को इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी। हरीश राणा 13 साल से कोमा में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के माता-पिता की ओर से दाखिल इच्छामृत्यु की अर्जी पर एम्स के डॉक्टरों से रिपोर्ट मंगाई थी। एम्स के डॉक्टरों ने रिपोर्ट में कहा था कि हरीश राणा ठीक नहीं हो सकते। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हरीश राणा के पैसिव यूथेनेशिया को मंजूरी दी।

हरीश राणा का परिवार यूपी के गाजियाबाद में रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु की अपील करने वाले उनके माता-पिता से पिछली सुनवाई में बात की थी। हरीश के माता-पिता ने कोर्ट को बताया था कि उनका बेटा 100 फीसदी दिव्यांग हो चुका है।

एम्स ने जब हरीश राणा के कभी ठीक न होने की बात रिपोर्ट में बताई, तो उसे पढ़कर जस्टिस जेबी पारदीवाला ने बहुत दुख जताया था। उन्होंने कहा था कि फैसला अंतिम चरण में है और इसे करना मुश्किल है। हरीश को हम इस हालत में नहीं रख सकते।

गाजियाबाद के हरीश राणा चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। साल 2013 में हरीश राणा अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे थे। नीचे गिरने से हरीश राणा के सिर में गंभीर चोट आई और वो कोमा में चले गए। लगातार एक ही स्थिति में बिस्तर पर लेटे रहने के कारण हरीश राणा को बेड सोर भी हो गया था।

अपने बेटे की हालत माता-पिता से नहीं देखी गई। इसलिए उन्होंने हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। अब सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद हरीश राणा और उनके परिवार को 13 साल के दुख से छुटकारा मिल सकेगा।

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